इन संतों की सूझबूझ और सराहनीय प्रयासों से हुआ गुरु शिष्य परंपरा के दरकते अध्याय का सुखद पटाक्षेप,उत्तरी, मध्य हरिद्वार और रुड़की के आश्रमो से हुए संयुक्त प्रयास

सुमित यशकल्याण


हरिद्वार । अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और प्रयागराज स्थित श्री बाघंबरी पीठ के श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज और उनके शिष्य आनंद गिरि के बीच पिछले कुछ समय से चल रहे विवाद का आखिरकार गत दिवस सुखद पटाक्षेप हो गया। गुरु शिष्य परंपरा के दरकते हुए इस अध्याय का सुखद पटाक्षेप कराने में कुछ संत जहां प्रत्यक्ष रूप से जुटे हुए थे वहीं कुछ संतों ने पर्दे के पीछे रहकर अहम भूमिका निभाई। श्री महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरी का अनन्य प्रेम संत समाज में काफी प्रशंसनीय रहा है। लेकिन कुछ समय से दोनों के बीच मतभेद ऐसे बढ़े कि विवाद खुलकर सामने आने लगा और एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए जाने लगे थे। लेकिन भारत की सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली गुरु शिष्य की परंपरा के इस अध्याय का हरिद्वार के कुछ संतों ने दोनों ही पक्षों से संवाद करके सुखद पटाक्षेप करा दिया। इस मामले में एक और जहां अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरीगिरी महाराज लगातार प्रयासरत थे वही श्री निरंजनी अखाड़े के सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी महाराज लगातार यह प्रयास कर रहे थे कि मामला विवाद बढ़ने के बजाय गरिमामय तरीके से शांत हो और गुरु शिष्य की परंपरा की गरिमा बनी रहे।

महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश महाराज

इसके साथ ही श्री अवधूत मंडल आश्रम के श्रीमहंत महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश महाराज, चेतन ज्योति आश्रम के परमाध्यक्ष महंत ऋषिस्वरानंद महाराज, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के मीडिया प्रभारी रामानंद ब्रह्मचारी और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने भी इस प्रकरण में पर्दे के पीछे रहकर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चेतन ज्योति आश्रम से निरंजनी अखाड़े के कई वरिष्ठ संतो के लंबे समय से आत्मीय संबंध रहे हैं। महंत आनंद गिरि वह भी इस विवाद के दौरान जब अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया था तब उन्होंने चेतन ज्योति आश्रम में ही जाकर शरण ली थी।

इन सभी संतों के प्रयासों का ही यह परिणाम था कि गुरु इसलिए की जो लड़ाई सड़कों पर आ गई थी वह अब समाप्त हो गई है । इस पूरे प्रकरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से जिला प्रचारक शरद कुमार कि जिस तन्मयता से जुटे उनके प्रयासों की भी हर तरफ सराहना हो रही है।

आनंद गिरि ने जहां अपने गुरु श्री महंत नरेंद्र गिरि के चरण छू कर माफी मांग ली है वही बड़ा दिल दिखाते हुए श्री महंत नरेंद्र गिरि महाराज ने भी उन्हें माफ कर दिया है। एक बार फिर दोनों गुरु शिष्य एक दूसरे की भावनाओं को समझते हुए विवाद का निपटारा कर एक साथ आ गए। हरिद्वार में हो रहे कुंभ के दौरान शुरू हुआ यह विवाद संतो के प्रयासों से कुंभ के तुरंत बाद निपट गया,

निरंजनी अखाड़े के सचिव श्री महंत रविंद्र पुरी महाराज ने विवाद के निपटारे का स्वागत करते हुए कहा कि दोनों ही पक्षों ने समझदारी दिखाई जिस तरह से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी महाराज ने किसी की गलतियों को नजरअंदाज कर माफ कर दिया उससे गुरु शिष्य की परंपरा की गरिमा और ज्यादा बढी है। यही भारतीय संस्कृति की खूबसूरती है।

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