अयोध्या में राम मंदिर के बाद अखाड़ा परिषद ने किया काशी और मथुरा को मुक्त कराने का ऐलान, आर आर एस और विश्व हिंदू परिषद सहित धार्मिक संस्थाओं से मांगा सहयोग,

हरीश कुमार

प्रयागराज। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में हुई इमरजेंसी बैठक में साधु संतो ने सर्व सम्मति से कुल 8 प्रस्ताव पास किये हैं। इस बैठक में अयोध्या के बाद अब काशी-मथुरा को भी मुक्त कराने के लिये रणनीति तैयार की गई है और काशी और मथुरा को स्वेच्छा से हिंदुओं को सौंपने की अखाड़ा परिषद ने अपील की है। अयोध्या की तरह काशी और मथुरा की मुक्ति के लिए आरएसएस-वीएचपी से अखाड़ा परिषद समर्थन भी मांगा है। अखाड़ा परिषद ने कहा है कि काशी और मथुरा को मुक्त कराने के लिए वीएचपी और आरएसएस के साथ ही अन्य हिन्दूवादी संगठनों की मदद से बड़ा अखाड़ा परिषद आंदोलन खड़ा करेगा। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और महामंत्री श्रीमहन्त हरिगिरि ने कहा है कि आम सहमति न बनने पर संवैधानिक तरीके से कोर्ट के माध्यम से कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।

वहीं प्रयागराज में जनवरी में होने वाले माघ मेले पर रोक न लगाने की अखाड़ा परिषद ने सरकार से अपील की है और केंद्र और राज्य सरकार की गाइड लाइन के मुताबिक हो माघ मेले का आयोजन करने की बात कही है।
अखाड़ा परिषद ने माघ मेले में संस्थाओं पर रोक लगाकर संत-महात्माओं और कल्पवासियों को स्थान देने की मांग की है। प्रयागराज की परिक्रमा की परंपरा में इस बार कम संख्या में साधु-संत शामिल होंगे।अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहन्त हरि गिरी ने कहा कि कुम्भ 2019 से शुरु हुई प्राचीन प्रयागराज परिक्रमा इस बार भी माघ मेले के दौरान होगी , इसके लिए जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार का सहयोग जरूरी है ।

बढ़ते लव जेहाद के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ की करवाई के लिए अखाड़ा परिषद ने सीएम को धन्यवाद दिया है। महंत नरेंद्र गिरी ने कहा है कि यूपी में योगी की सक्षम सरकार है और यूपी में मुस्लिम बहुल इलाकों में रहने वाले हिंदुओं को डरने की ज़रूरत नही है लेकिन महाराष्ट्र में साधू असुरक्षित है और उनकी हत्याएं हो रही है पालघर को घटना की सीबीआई से जांच की कराने की भी मांग की गई प्रयागराज में श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी में कोरोना की गाइड लाइन के साथ इस बैठक का आयोजन किया गया । इस बैठक में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहन्त नरेंद्र गिरि , महामंत्री श्रीमहन्त हरिगिरि के साथ 13 अखाड़ो के प्रतिनिधि शामिल रहे जिनमे प्रमुख रूप से श्रीमहन्त प्रेमगिरि , श्रीमहन्त राजेन्द्र दास , महन्त व्यास मुनि , श्रीमहन्त महेश पुरी , श्रीमहंत नारायण गिरि , महन्त सोमेश्वर , श्रीमहन्त सत्यगिरी , श्रीमहन्त धर्मदास आदि मौजूद रहे ।

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