परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता है— मनोज श्रीवास्तव

सुमित यशकल्याण

हरिद्वार। दृढ विश्वास और संकल्प परीक्षा के सफलता का मूल मंत्र है। परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता है। परिश्रम का रिजल्ट अवश्य मिलता है। यह बात प्रशासन द्वारा संचालित प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु भल्ला कालेज में चलाये जा रही नि:शुल्क प्रेरणा कोचिंग में गेस्ट लेक्चर्र के रूप में मनोज श्रीवास्तव नोडल अधिकारी कुंभ मेला मीडिया ने कही। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के संबंध में महत्वपूर्ण टिप्स देते हुए कहा कि हमारे व्यक्तित्व की झलक प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में दिख जाती है।

इसके लिए व्यापक योजना और रणनीति बनाकर अपने मिशन पर जुट जाना चाहिए। प्रमाणिक पुस्तकों का अध्ययन, दिया गया पाठयक्रम और पिछले वर्षों का अनसॉल्वड प्रश्नपत्र अनिवार्य रूप से हल कर लेना चाहिए। हमें स्पष्ट पता होना चाहिए कि हम किस परीक्षा के लिए योग्य हैं। अर्थात हमें क्या करना है और क्यों करना है। प्रश्नपत्र को हल करते समय, समय का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। पुस्तकों को पढने के समय कोर सेक्टर पर विशेष फोकस रखना चाहिए क्योंकि सम्पूर्ण पुस्तक की तुलना में कोर सेक्टर से ही अधिकांश प्रश्न तैयार किए जाते हैं। अर्थात क्या पढना है से अधिक है कि क्या नहीं पढना है। उन्होंने कहा कि सौं पुस्तकें एक बार पढने से अधिक अच्छा है एक अच्छी पुस्तक को सौं बार पढा जाए।
सहायक अर्थ संख्या अधिकारी व समन्वयक प्रेरणा कोचिंग सुभाष शाक्य ने कहा कि प्रशासन के सहयोग से जनपद के युवा वर्ग को प्रतियोगी परीक्षा हेतु निशुल्क कोचिंग प्रदान की जा रही है। इसका उददेश्य युवा वर्ग को अच्छा नागरिक बनाकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये तैयार करना है।

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